Sunday, 18 November 2012

सेक्स : दस बीमारियों का बस एक इलाज

क्या आपको पता है कि नियमित सेक्स से पैदा होने वाले हारमोन से 'ऑस्टियोपोरोसिस' नामक बीमारी नहीं होती? दरअसल वैज्ञानिकों का एक बड़ा दल सेक्स से संबंधी भ्रांतियों को बदलने के लिए शोध में जुटा है। यह दल मानता है कि खुद को तरोताजा रखने व तनाव को दूर करने के लिए नियमित सेक्स एक अच्छा उपचार है।

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सेक्स से शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन उत्पन्न होता है जो हड्डियों की बीमारी 'ऑस्टियोपोरोसिस' नहीं होने देता है। 

सेक्स से स्किन होती है सुंदर 
सेक्स से एंडॉर्फिन हार्मोन की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे स्किन सुंदर, चिकनी व चमकदार बनती है। एस्ट्रोजन हार्मोन शरीर के लिए एक चमत्कार है, जो एक अनोखे सुख की अनुभूति कराता है। 

सेक्स से परहेज यानी बीमारियों को न्योता 
सफल व नियमित सेक्स करने वाले दंपति अधिक स्वस्थ देखे गए हैं। उनका सौंदर्य भी लंबी उम्र तक बना रहता है। उनमें उत्तेजना, उत्साह, उमंग और आत्मविश्वास भी अधिक होता है। सेक्स से परहेज करने वाले शर्म, संकोच, अपराधबोध व तनाव से पीड़ित रहते हैं। यहां तक कि लंबी उम्र तक सेक्सुअल लाइफ आरंभ ना हो तो लड़कियों में फायब्राइड्स की समस्या हो जाती है। पुरुषों में अधिक समय तक सेक्स के प्रति अरूचि हो तो नपुंसकता का खतरा बढ़ जाता है। 

सेक्स एक प्रकार का व्यायाम 
सेक्स एक प्रकार का व्यायाम भी है। सेक्स व्यायाम शरीर की मांसपेशियों के खिंचाव को दूर करता है और शरीर को लचीला बनाता है। एक बार का हेल्दी सेक्स किसी थका देने वाले एक्सरसाइज या स्विमिंग के 10-20 चक्करों से अधिक असरदार होता है। सेक्स विशेषज्ञों के अनुसार मोटापा और कमर दर्द दूर करने के लिए सेक्स काफी सहायक सिद्ध होता है। 

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'किस' से वजन घट सकता है 
सेक्स से शारीरिक ऊर्जा खर्च होती है, जिससे चर्बी घटती है। एक बार के सेक्स में 500 से 1000 कैलोरी ऊर्जा खर्च होती है। सेक्स के समय लिए गए चुंबन भी मोटापा दूर करने में सहायक सिद्ध होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सेक्स के समय लिए गए एक चुंबन से लगभग 9 कैलोरी ऊर्जा खर्च होती है। इस तरह 390 बार चुंबन लेने से 1/2 किलो वजन घट सकता है। 

फेरोमोंस मतलब सेक्स परफ्यूम 
वैज्ञानिकों ने शोध करके पता लगाया है कि सेक्स अगर स्वस्थ दिल-दिमाग और मानसिकता से किया जाए तो फेरोमोंस नामक रसायन शरीर में एक प्रकार की गंध उत्पन्न करता है, जिसे सेक्स परफ्यूम कहा जा सकता है। 

सेक्स से भागने वालों को होता है हार्ट अटैक 
यह सेक्स परफ्यूम दिल व दिमाग को असाधारण सुख व शांति देता है। सेक्स हृदय रोग, मानसिक तनाव, रक्तचाप और दिल के दौरे से दूर रखता है। सेक्स से भागने वाले इन रोगों से अधिक पीड़ित रहते हैं।

सेक्स से शरीर में अनेक प्रकार के हार्मोन उत्पन्न होते हैं, जो शरीर के स्वास्थ्य एवं सौंदर्य को बनाए रखने में सहायक होते हैं। इससे पहले वैज्ञानिक यह सिद्ध कर चुके हैं कि सेक्स कई रोगों का इलाज भी है। जीवन में सेक्स एक-दूजे के बीच सुख, आनंद, अपनापन लाता है, वहीं एक-दूजे की हेल्थ एवं ब्यूटी को भी बनाए रखता है।

सर्दियों में योगा


योगा सेहत के लिए फायदेमंद होता है। इतना ही नहीं पुरानी बीमारियों से निजात पाना हो या दिनभर चुस्ते-दुरूस्त रहना हो, इसके लिए योगा से बढि़या उपाय कोई नहीं। क्या आप जानते हैं योगा के फायदे बहुत हैं। लेकिन सवाल ये उठता है सर्दियों में योगा कितना जरूरी है और क्यों। आइए जानें योग के बारे में कुछ बातें।


सर्दियों में योग के फायदे 
  • आलसपन को दूर करें- सर्दियों में योग करने से शरीर चुस्त-दुरूस्त रहता है। आमतौर पर लोग सर्दियों में बिस्तर से निकलने में आलस करते हैं लेकिन जो लोग नियमित रूप से सर्दियों में भी योग करते हैं उन्हें किसी भी काम को करने में आलस नहीं आता। इतना ही नहीं चिंता दूर करनी है तो करिए योग
  • दर्द से निजात- सर्दियों में अकसर लोग जोड़ों के दर्द, बदनदर्द, कमरदर्द, सिरदर्द इत्यादि से परेशान रहते हैं, लेकिन यदि आप नियमित रूप से योगा करते हैं तो आपको ना सिर्फ किसी भी दर्द से निजात मिलेगी बल्कि सर्दियों में होने वाली परेशानियों से भी आप दूर रहेंगे।
  • खांसी-जुकाम रहेगा दूर- सर्दियों में अकसर लोगों को या तो एलर्जी हो जाती है या फिर संक्रमण और ठंड के चलते उन्हें खांसी-जुकाम की समस्या होने लगती हैं। लेकिन प्रतिदिन योगा करने वाले लोगों को इस तरह की समस्याओं से निजात मिलती है।
  • शरीर में फुर्ती- नियमित रूप से योगा करने वाले लोगों के शरीर में लचीलापन बरकरार रहता है। इतना ही नहीं ऐसे लोगों के शरीर में फुर्ती भी बनी रहती है।
  • बीमारियां रहेंगी दूर- सर्दियों के दौरान योगा करने से बीमारियां दूर रहती हैं। दरअसल जो लोग रोजाना योगा करते हैं उनका इम्युन सिस्टम मजबूत रहता है, जिससे बीमारियों के होने की आशंका खत्म हो जाती है।
  • वजन कम करने में लाभदायक- मोटापा कम करने के लिए योगा से बढि़या उपाय कोई नहीं। यदि आप अपना वजन सही रूप में कम करना चाहते हैं और अपने आपको लंबे समय तक फिट रखना चाहते हैं तो आपको नियमित रूप से योगा करना चाहिए। यह तो आप जानते ही हैं कि सर्दियों के दौरान 3-4 किलो वजन बढ़ना आम बात है। लेकिन आप सर्दियों के दौरान भी योगा करते हैं तो आपका वजन ना तो बढ़गा बल्कि आप फिट भी रहेंगे।
  • एक्ट्रा  कैलोरी बर्न करने में फायदेमंद- आप सैर पर नहीं जा पाते या फिर आपको दिनभर बैठे रहना पड़ता है या आपको भूख बहुत अधिक लगती है तो ऐसे में योगा से आप फिट रह सकते हैं। दरअसल, योग के माध्यम से आप शरीर की अतिरिक्त कैलोरी को आसानी से कम कर सकते हैं।
  • चर्बी घटाएं- योग के माध्यम से सिर्फ वजन ही नहीं घटाया जा सकता बल्कि शरीर के विभिन्न हिस्सों में मौजूद अतिरिक्त चर्बी को कम करने में भी मदद मिलती है। 
इसके अलावा भी सर्दियों में योगा करने के बहुत फायदे हैं। आपको हल्कापन महसूस होता है, आप तनावरहित रह सकते हैं। आप अपने काम पर अधिक फोकस कर सकते हैं। इतना ही नहीं योगा से आपके मस्तिष्क को बहुत लाभ पहुंचता है। मस्तिष्क की कार्यकुशलता बढ़ाने और तेज दिमाग पाने के लिए सर्दियों में योगा करना और भी जरूरी हो जाता है।

सर्दियों में बालों की देखभाल


बाल किसी भी इंसान की खूबसूरती का आइना होते है। लंबे सिल्की और डैंड्रफ फ्री बाल किसी का भी ख्वाब हो सकता है। यही वजह है कि सर्दियों के मौसम में बालों की देखभाल बहुत ज्यादा जरूरी हो जाती है। अगर बालों की उचित देखभाल ना की जाए तो ये टूटने लगते हैं। इनमें रूखापन आ जाता है और बालों में डैंड्रफ की समस्या हो सकती है। सर्दियों में बालों को भी अतिरिक्त खुराक की जरूरत पड़ती है ताकि वे अपनी प्राकृतिक चमक बनाएं रख सकें। हेयर केयर सर्दियों में कैसे की जाएं, कैसे आप सर्दियों में भी बालों में चमक बरकरार रख सकते हैं। आइए जानें सर्दियों में बालों की देखभाल के बारे में।
  • सर्दियों में रोजाना बाल धोना संभव नहीं हो पाता, इस कारण सिर की त्वचा पर यानी स्कैल्प पर धूल और गंदगी के कारण छिद्र बंद हो जाते हैं और बालों को जरूरी खुराक नहीं मिल पाती।
  • सर्दियों में बालों के लिए तेल बेहद जरूरी होता है। इससे बालों को नमी मिलती है। लेकिन तेल का चयन अपने बालों की प्रकृति के हिसाब से ही करना चाहिए। देसी पद्वतियों की बात करें तो सर्दियों में नारियल, ब्राह्मी, बादाम और तिल का तेल बालों के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
  • सर्दियों में बालों की देखभाल के लिए जरूरी है कि उन्हें विटामिन डी युक्त पोषण देना चाहिए। और ये पोषण धूप से भी दिया जा सकता है। यानी सर्दियों में बालों को धूप में सेंकना फायदेमंद होता है।
  • सर्दियों के मौसम में बालों को हमेशा माइल्ड शैंपू से ही धोना चाहिए और ये याद रखिए कि हार्ड कैमिकल युक्त शैंपू से बालों को नुकसान हो सकता है। माइल्ड शैंपू के साथ-साथ कंडीशनर का इस्तेमाल भी जरूर करें। ताकि बालों को आसानी से संवारा जा सकें।
  • बालों को सर्दियों में भी चुस्त-दुरूस्त रखने के लिए खान-पान का भी खास ख्याल रखना चाहिए। इससे बालों को भरपूर पोषण मिलेगा और बाल भी हेल्दी होंगे।
  • सर्दियों में डेंड्रफ एक आम समस्या हैं,मजेदार बात है कि लोग इससे निपटने के लिए एंटी डैंड्रफ शैंपू का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन आपके लिए ये जानना बहुत जरूरी है कि आप किस तरह के एंटी डेंड्रफ शैंपू का इस्तेमाल कर रहे हैं। साथ ही रोज एंटी-डेंड्रफ शैंपू का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
  • आपको ये मालूम होना चाहिए कि विटामिन-एच की कमी से बाल झड़ते हैं। लिहाजा,आपको बायोटीन जैसी दवाओं का इस्तेमाल करें जिनमें विटामिन-एच की पर्याप्त मात्रा होती है, इससे आपके बालों का झड़ना रूक जाएगा।
  • आपको यह भी मालूम होना चाहिए कि बाल प्रोटीन के बने होते है, इसीलिए अपनी डायट में प्रोटीनयुक्त चीजें जरूर लें। जैसे- दूध, सीरिल्स, रेड मीट और सोयाबीन ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जिनमें अच्छी खासी प्रोटीन की मात्रा होती है।
  • सर्दियों में बालों की देखभाल के लिए एक घरेलू उपचार काफी मददगार साबित हो सकता हैं। एक कप आंवले का पाउडर, दो चम्मच केस्टर तेल और एक अंडे को एक साथ अच्छी तरह फेट कर मिला लें। इसे सिर और बालों की त्वचा पर अच्छी तरह से लगाएं। आधें घंटें के बाद हल्के गुनगुने पानी से सिर धो लें।
  • ऐसा माना जाता है कि जैविक खाद से तैयार ताजा और पौष्टिक आहार बालों की सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। लिहाजा अपने आहार में हरी सब्जियां और गाजर आदि को शामिल करें।

सर्दियों का मौसम और मधुमेह


सर्दियों का मौसम जहां एक ओर सर्द हवाएं लेकर आता है वहीं सर्दियों में शुरू होती है स्वस्थ रहने की कयास। जी हां, सर्दियों में बीमार पड़ना आम बात है लेकिन मुश्किल उन लोगों के लिए अधिक होती है जो लंबे समय से किसी बीमारी से पीडि़त होते हैं, जैसे मधुमेह रोगी। सर्दियों में मधुमेह रोगियों को बहुत देखभाल की जरूरत होती है। हालां‍कि सर्दियों के मौसम में मधुमेह रोगियों के लिए अच्छी बात ये है कि इन्हें खाने-पीने की चीजों को पचाने में असानी होती है, यानी सर्दियों में इनका डायजेस्ट सिस्टम फिट रहता है। आइए जानें सर्दियों का मौसम और मधुमेह रोगियों की देखभाल के बारे में कुछ और बातें।

  • यह बात तो सभी जानते हैं मधुमेह रोगियों का इम्यूकन सिस्टम बहुत कमजोर हो जाता है, जिससे उन्हें गंभीर बीमारियां जल्दी घेर लेती है, ठीक इसी तरह मधुमेह रोगियों को गरिष्ठ भोजन के अलावा, सामान्य भोजन पचाने में भी बहुत मुश्किलें आती है। उनका मधुमेह के दौरान पाचनतंत्र कमजोर पड़ जाता है जिससे उन्हें कुछ भी पचाने में बहुत मुश्किल होती है। लेकिन सर्दियों मधुमेह रोगी आराम से कुछ भी पचा सकते हैं।
  • सर्दियों में खाने को मधुमेह रोगी यदि ठीक से पचा पाते हैं तो उनको कब्ज, गैस्ट्रिक और पेट संबंधी बीमारियां भी नहीं होती।
  • सर्दियों के मौसम में मधुमेह रोगी जो भी खाते-पीते हैं वे उनके शरीर को पूरी तरह से लगता है जिससे उनमें आई कमजोरी को आसानी से भरा जा सकता है।
  • ऐसे में उनके शरीर में प्रोटीन, कैल्शियम इत्यादि पोषक तत्वों की कमी भी नहीं होती और उनकी शारीरिक कमजोरी भी दूर होने लगती है।
  • सर्दियों में मधुमेह रोगियों का इम्यून सिस्टम गर्मियों के मौसम के मुकाबले ठीक रहता है। लेकिन लगातार बदलते मौसम में मधुमेह रोगी की सबसे पहले बीमार हो जाते हैं।
  • मधुमेह रोगियों को सर्दियों में अधिक से अधिक सूखे मेवों, बादाम, मूंगफली, काजू, अखरोट इत्यादि का सेवन करना चाहिए। इससे उनकी शारीरिक ताकत बढ़ती है और वे बीमारियों से बचे रहते हैं। कहने का अर्थ मधुमेह रोगियों का उचित और पौष्टिक खान-पान सर्दियों के मौसम में सही रूप से हो तो उन्हें कई बीमारियों को होने से बचाया जा सकता है।
  • सर्दियों के मौसम में हालांकि ठंड बहुत होती है लेकिन मधुमेह रोगी यदि इस मौसम में एक्सरसाइज और सैर करेंगे तो उनकी सेहत के लिए ये एक बढि़या उपाय है। इससे उनकी मांसपेशियां मजबूत होंगी और उनकी हड्डियों में जान आएगी।
  • मधुमेह रोगियों को खासकर बदलते मौसम और सर्दियों के दौरान ग्रीन टी, लेमन टी, ब्लै‍क टी या फिर तुलसी की चाय पीनी चाहिए, ये इनको बहुत लाभ पहुंचाएगी।
  • यदि मधुमेह रोगी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली चीजों का सेवन करें जैसे- आंवला, तुलसी, हल्दी, काली मिर्च इत्यादि का तो इससे उन्हें ना सिर्फ शारीरिक तौर पर लाभ पहुंचेगा बल्कि वे भविष्य में होने वाली बीमारियों की आशंका को भी रोक सकते हैं।
  • मधुमेह रोगियों को सर्दियों का अधिक से अधिक फायदा उठाना चाहिए और शरीर में बढ़ रही ग्लूकोज की मात्रा को कम कर प्रोटीन की मात्रा में वृद्धि‍ करनी चाहिए, इससे वे मधुमेह को तो कम कर ही देंगे इसके साथ ही अन्य बीमारियों को पनपने से भी रोक पाएंगे।

सर्दियों में स्‍वास्‍थ्‍य की देखभाल


सर्दियों का मौसम सभी को लुभावना लगता है लेकिन इसके साथ ही सबसे बड़ी जो समस्या आती है वह सर्दियों में एलर्जी होना। जी हां, सर्दियों में लोगों को कई तरह की एलर्जी हो जाती है। कई लोगों को गर्म कपड़े पहनने से एलर्जी होती है तो कई लोगों को मौसम बदलते ही स्किन एलर्जी होती है जिससे उनके शरीर पर खुजली होने लगती है, जबकि कई लोगों को रूखी त्वचा के कारण एलर्जी हो जाती है और कुछ लोगों को सर्दी बढ़ते-बढ़ते खांसी, जुकाम इत्यादि एलर्जी घेर लेती है। आपको एलर्जी ना हो और आप सर्दियों का मजा आराम से ले सकें इसके लिए जरूरी है थोड़ी सी सावधनी बरतनी की। आइए जानें सर्दियों के मौसम में एलर्जी से कैसे बचें।

विश्व एलर्जी संगठन (डब्ल्यूएओ) की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में तेजी से बढ़ता औद्योगिकीकरण और ग्लोबलाइजेशन के कारण एलर्जी जैसी कई बीमारियां बढ़ रही हैं। इतना ही नहीं इस रिपोर्ट में कहा गया कि बढ़ती हुई एलर्जी बच्चों को अधिक प्रभावित करती है। इतना ही नहीं,एलर्जी के कारण कई और बीमारियां जैसे- अस्थमा, राइनाइटिस, एनाफलैक्सिस, एक्जिमा और आर्टिकेरिया जैसी बीमारियों में बढ़ावा हो रहा है।

क्या आप जानते हैं आज के समय में लगभग 30 फीसदी देश की आबादी एलर्जी के भिन्न प्रकारों से पीडि़त है। ताजा आंकड़ों पर गौर करें तो लगभग 14-15 फीसदी लोग अस्थमा और 20 फीसदी से भी अधिक लोग राइनाइटिस से पीडि़त होते हैं। पिछले दो-ढाई दशक में बच्चों को एलर्जी ने अधिक चपेट में लिया है। क्या आप जानते हैं हर साल 15-20 फीसदी महिलाएं सर्दियों के आगमन के साथ ही स्किन एलर्जी से पीडि़त हो जाती हैं।
            
एलर्जी के लक्षण
  • मौसम ठंडा होते ही कोल्ड होना
  • गर्म कपड़े पहनते ही खुजली होना सर्दियों में शरीर पर रेड रेशेज होना
  • त्वचा में रूखापन आना
  • चेहरे पर लाली आना
  • हर समय नाक बहना या नाक बंद होना
  • पसलियां चलना या खांसी होना
  • रूखी त्वचा पर खुजली होना  
एलर्जी से बचने के उपाय
    • आप जब भी कोई गर्म कपड़ा पहने तो उसके नीचे कॉटन या फिर कोई पतला कपड़ा जरूर पहनें। स्किन को सीधे तौर पर वुलन के कॉन्टेक्ट में ना आने दें।
    • सर्दियों का मौसम आते ही शरीर पर तेल ये मॉश्चराइजर का प्रयोग करें अन्यथा नहाते समय पूरे शरीर पर तेल से मालिश करें। इससे आपके त्व्चा से रूखापन गायब होगा।
    • जब भी आपको खुजली या त्वचा लाल हो तो आपको या तो स्किन स्पेशलिस्ट से मिलना चाहिए अन्यथा खुजलाने के बजाय पॉउडर या मॉश्चराइजर का इस्तेमाल करना चाहिए।
    • कुछ लोगों को वुलन पहनते ही नाक बहने लगती है और आंख से पानी बहने लगता है, ऐसे लोगों को स्किन एलर्जी हो जाती है।
    • यदि आपको कुछ वुलन कपड़ों से एलर्जी की समस्या होती है तो आपको वो अधिक वुलन के कपड़े नहीं पहनने चाहिए या फिर अच्छी क्वालिटी के वुलन की ड्रेस पहननी चाहिए।
    • इसके अलावा आपको रात को सोते समय मॉश्चराइजर का इस्तेमाल करना चाहिए। आपको नहाने के बाद भी मॉश्चराइजर का प्रयोग करना चाहिए और कोशिश करें कि मॉश्चराइजर युक्त ही साबुन का प्रयोग भी करें।
    • घर से जब भी ठंड के मौसम में बाहर निकलें तो अपना मुंह ढककर निकले ताकि आप एलर्जी से बच सकें।

    सर्दियों का मौसम और एलर्जी


    सर्दियों का मौसम सभी को लुभावना लगता है लेकिन इसके साथ ही सबसे बड़ी जो समस्या आती है वह सर्दियों में एलर्जी होना। जी हां, सर्दियों में लोगों को कई तरह की एलर्जी हो जाती है। कई लोगों को गर्म कपड़े पहनने से एलर्जी होती है तो कई लोगों को मौसम बदलते ही स्किन एलर्जी होती है जिससे उनके शरीर पर खुजली होने लगती है, जबकि कई लोगों को रूखी त्वचा के कारण एलर्जी हो जाती है और कुछ लोगों को सर्दी बढ़ते-बढ़ते खांसी, जुकाम इत्यादि एलर्जी घेर लेती है। आपको एलर्जी ना हो और आप सर्दियों का मजा आराम से ले सकें इसके लिए जरूरी है थोड़ी सी सावधनी बरतनी की। आइए जानें सर्दियों के मौसम में एलर्जी से कैसे बचें।

    विश्व एलर्जी संगठन (डब्ल्यूएओ) की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में तेजी से बढ़ता औद्योगिकीकरण और ग्लोबलाइजेशन के कारण एलर्जी जैसी कई बीमारियां बढ़ रही हैं। इतना ही नहीं इस रिपोर्ट में कहा गया कि बढ़ती हुई एलर्जी बच्चों को अधिक प्रभावित करती है। इतना ही नहीं,एलर्जी के कारण कई और बीमारियां जैसे- अस्थमा, राइनाइटिस, एनाफलैक्सिस, एक्जिमा और आर्टिकेरिया जैसी बीमारियों में बढ़ावा हो रहा है।

    क्या आप जानते हैं आज के समय में लगभग 30 फीसदी देश की आबादी एलर्जी के भिन्न प्रकारों से पीडि़त है। ताजा आंकड़ों पर गौर करें तो लगभग 14-15 फीसदी लोग अस्थमा और 20 फीसदी से भी अधिक लोग राइनाइटिस से पीडि़त होते हैं। पिछले दो-ढाई दशक में बच्चों को एलर्जी ने अधिक चपेट में लिया है। क्या आप जानते हैं हर साल 15-20 फीसदी महिलाएं सर्दियों के आगमन के साथ ही स्किन एलर्जी से पीडि़त हो जाती हैं।
                
    एलर्जी के लक्षण
    • मौसम ठंडा होते ही कोल्ड होना
    • गर्म कपड़े पहनते ही खुजली होना सर्दियों में शरीर पर रेड रेशेज होना
    • त्वचा में रूखापन आना
    • चेहरे पर लाली आना
    • हर समय नाक बहना या नाक बंद होना
    • पसलियां चलना या खांसी होना
    • रूखी त्वचा पर खुजली होना 
    एलर्जी से बचने के उपाय
      • आप जब भी कोई गर्म कपड़ा पहने तो उसके नीचे कॉटन या फिर कोई पतला कपड़ा जरूर पहनें। स्किन को सीधे तौर पर वुलन के कॉन्टेक्ट में ना आने दें।
      • सर्दियों का मौसम आते ही शरीर पर तेल ये मॉश्चराइजर का प्रयोग करें अन्यथा नहाते समय पूरे शरीर पर तेल से मालिश करें। इससे आपके त्व्चा से रूखापन गायब होगा।
      • जब भी आपको खुजली या त्वचा लाल हो तो आपको या तो स्किन स्पेशलिस्ट से मिलना चाहिए अन्यथा खुजलाने के बजाय पॉउडर या मॉश्चराइजर का इस्तेमाल करना चाहिए।
      • कुछ लोगों को वुलन पहनते ही नाक बहने लगती है और आंख से पानी बहने लगता है, ऐसे लोगों को स्किन एलर्जी हो जाती है।
      • यदि आपको कुछ वुलन कपड़ों से एलर्जी की समस्या होती है तो आपको वो अधिक वुलन के कपड़े नहीं पहनने चाहिए या फिर अच्छी क्वालिटी के वुलन की ड्रेस पहननी चाहिए।
      • इसके अलावा आपको रात को सोते समय मॉश्चराइजर का इस्तेमाल करना चाहिए। आपको नहाने के बाद भी मॉश्चराइजर का प्रयोग करना चाहिए और कोशिश करें कि मॉश्चराइजर युक्त ही साबुन का प्रयोग भी करें।
      • घर से जब भी ठंड के मौसम में बाहर निकलें तो अपना मुंह ढककर निकले ताकि आप एलर्जी से बच सकें।

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